श्री हनुमान जी हिंदू धर्म के सबसे पूजनीय और लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं, जिन्हें भगवान राम के परम भक्त, सबसे विश्वसनीय सेवक और अनन्य साथी के रूप में जाना जाता है। वे वानरराज केसरी और माता अंजना के पुत्र हैं तथा पवनदेव (वायु देवता) की कृपा से जन्म लेने के कारण पवनपुत्र, मारुति, आंजनेय और बजरंगबली जैसे कई नामों से प्रसिद्ध हैं। अधिकांश मान्यताओं के अनुसार वे भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार माने जाते हैं। बचपन में सूर्य को फल समझकर ग्रहण करने के प्रयास में इंद्र के वज्र से चोट लगने पर उन्हें हनुमान (हनु = जबड़ा) नाम मिला। अपार शारीरिक बल, बुद्धिमत्ता, ब्रह्मचर्य, निष्ठा और राम-भक्ति के प्रतीक हनुमान जी ने रामायण में कई महान कार्य किए—जैसे लंका जाकर सीता जी को ढूंढना और राम का संदेश पहुँचाना, लक्ष्मण जी को संजीवनी बूटी लाकर प्राण बचाना, रावण की सेना का संहार करना और राम-कार्य में हर संकट में सहायता प्रदान करना। वे चिरंजीवी (अमर) हैं और आज भी पृथ्वी पर मौजूद माने जाते हैं। संकटमोचन के रूप में वे भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। मंगलवार और शनिवार को उनकी विशेष पूजा होती है, और हनुमान चालीसा, आरती तथा राम-नाम जप उनके सबसे प्रिय भजन हैं। उनकी भक्ति से बल, बुद्धि और निर्भयता प्राप्त होती है।
Shree Hanuman
हनुमान जी को केवल राम भक्त ही नहीं, बल्कि भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार के रूप में भी पूजा जाता है, और वे चिरंजीवी होने के कारण आज भी धरती पर मौजूद माने जाते हैं। बचपन में वे बहुत शरारती थे—ऋषियों की तपस्या में विघ्न डालते थे, जिसके कारण ऋषियों ने उन्हें श्राप दिया कि वे अपनी शक्तियों को भूल जाएंगे, और ये शक्तियां तब जागृत हुईं जब राम ने उन्हें याद दिलाया। हनुमान जी के पांच सगे भाई भी थे—श्रुतिमान, गतिमान, मतिमान, केतुमान और धृतिमान—जो विवाहित थे, लेकिन हनुमान जी स्वयं ब्रह्मचारी रहे। उनकी पत्नी के बारे में कुछ कथाओं में सूर्य की पुत्री सुवर्चला का उल्लेख मिलता है, जबकि अन्य में वे आजीवन अविवाहित ही बताए जाते हैं। हनुमान जी के पुत्र का नाम मकरध्वज है, जिसका जन्म उनके पसीने की एक बूंद से समुद्र में हुआ था, और वह लंका के पाताल लोक का रक्षक बना। एक रोचक कथा यह भी है कि हनुमान जी ने अपनी पूंछ से महाभारत में भीम का अहंकार चूर किया—वे बूढ़े वानर के रूप में रास्ता रोके बैठे, और भीम उनकी पूंछ हिला नहीं सके। बचपन में सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश पर इंद्र के वज्र से उनका जबड़ा (हनु) विकृत हो गया, इसलिए नाम हनुमान पड़ा, और शरीर वज्र जैसा मजबूत होने से बजरंगबली कहलाए। कुछ मान्यताओं में हनुमान जी ने हनुमद रामायण नामक रामकथा भी लिखी थी, जो बाद में समुद्र में विसर्जित हो गई क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनकी रचना वाल्मीकि रामायण से ऊपर मानी जाए। हनुमान जी कलयुग के देवता कहलाते हैं, क्योंकि उनकी भक्ति से संकट आसानी से दूर होते हैं, और वे बल, बुद्धि, विद्या के साथ-साथ विनम्रता के भी प्रतीक हैं।
दोहा
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर। वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥
🌸 आरती: श्री हनुमान जी की 🌸
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतन के प्रभु सदा सहायी॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियाराम जी के काज संवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमान जी की आरती गावे। बसि बैकुंठ परम पद पावे॥